Nagpur. एक हरे-भरे जंगल में चिंकी नाम की एक छोटी गिलहरी रहती थी। वह बहुत चंचल और प्यारी थी। हर दिन वह पेड़ों पर चढ़ती, उछलती-कूदती और अपने दोस्तों के साथ खेलती थी। एक दिन, खेलते-खेलते चिंकी को ज़मीन पर एक चमकता हुआ अखरोट मिला। वह बहुत सुंदर था—सुनहरा और थोड़ा-सा चमकदार। चिंकी ने उसे उठाया और सोचा, “यह तो जादुई लगता है!” जब उसने अखरोट को छुआ, अचानक एक आवाज़ आई— “चिंकी! मैं एक जादुई अखरोट हूँ। अगर तुम किसी की मदद करोगी, तो तुम्हारी एक इच्छा पूरी होगी!” चिंकी हैरान हो गई लेकिन उसने मन ही मन सोचा कि उसे किसी की मदद ज़रूर करनी चाहिए। अगले ही दिन उसे एक नन्हा खरगोश मिला जो झाड़ी में फँसा हुआ था। चिंकी ने जल्दी से अपनी तेज़ दाँतों से झाड़ी काटी और खरगोश को आज़ाद कर दिया। तभी फिर से वही आवाज़ आई—
“शाबाश चिंकी! अब बोलो, तुम्हारी क्या इच्छा है?” चिंकी बोली, “मैं चाहती हूँ कि पूरे जंगल के जानवर हमेशा खुश रहें और हमें कभी भूख न लगे।” जादुई अखरोट ने चमकते हुए कहा, “तथास्तु!” और जंगल में हर तरफ़ खाने-पीने की चीज़ें उगने लगीं—फल, मेवे, और मीठे बेर! चिंकी और उसके सारे दोस्त बहुत खुश हुए और जंगल में हमेशा के लिए खुशी फैल गई।
सीख: अगर हम दूसरों की मदद करते हैं, तो खुशियाँ खुद हमारे पास चली आती हैं।












