नागपुर. महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाती-जमाती आयोग के उपाध्यक्ष एडवोकेट धर्मपाल मेश्राम की अध्यक्षता में नागपुर के रवि भवन में आयोजित “आदिवासी पारधी न्याय संकल्प परिषद” में फासे पारधी समाज की 118 शिकायतों में से 30 गंभीर मामलों पर सुनवाई की गई। यह परिषद आदिवासी विकास विभाग द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें पारधी समाज की अमानवीय स्थिति उजागर हुई।
फासे पारधी समाज ने परिषद में बताया कि उन्हें गांववालों से भेदभाव, जंगलों से जबरन बेदखली, पानी की कमी, कुओं तक जाने की मनाही, नदी से पानी लाते वक्त डूबने से हुई बच्चियों की मौत, पुलिस अत्याचार, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और कब्रिस्तान की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस हिरासत से लापता दशरथ पवार की कहानी ने दिल दहलाया
धाराशिव की सारिका पवार ने बताया कि उनके पति दशरथ पवार को पुलिस ने जमीन विवाद में मारपीट कर हिरासत में लिया और तब से वे लापता हैं। सारिका ने रोते हुए पूछा – “पाँच बच्चों को कैसे पालूं?”
पानी के लिए आठ बच्चियों की मौत
कुओं पर स्पर्शबंदी के कारण पारधी समाज की बच्चियों को नदी से पानी लाना पड़ता है। इसी दौरान डूबने से आठ बच्चियों की मौत हुई। यह खुलासा सुन परिषद में सन्नाटा छा गया।
वनरक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवक की पुलिस पिटाई से मौत के कगार पर
विमल काळे ने बताया कि उनका भाई वनरक्षक की तैयारी कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे इतनी बेरहमी से पीटा कि वह जीवन-मृत्यु से जूझ रहा है।
अहिल्यानगर में पांच लोगों की हत्या
वैशाली पिपळे ने बताया कि उनके परिवार के पांच सदस्यों की गांव के गुंडों ने हत्या कर दी। मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक को 30 दिनों में जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं, अन्यथा मामला SIT को सौंपा जाएगा।
44 झूठे मुकदमों का आरोप
नांदेड़ के माधव भोसले ने दावा किया कि उनके खिलाफ हत्या और डकैती समेत 44 झूठे मुकदमे लगाए गए। आयोग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पुलिस अधीक्षक से जवाब मांगा और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
आयोग का सख्त रुख, दोषियों पर होगी कार्रवाई
एडवोकेट मेश्राम ने सभी पीड़ितों को न्याय दिलाने का आश्वासन देते हुए कहा कि निर्दोष पारधी समाज पर झूठे मुकदमे चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इस परिषद ने विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के पारधी समाज की पीड़ा को सामने लाकर समाज में नई जागरूकता पैदा की है। आयोग ने 30 दिनों में सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आदेश देते हुए पारधी समाज को न्याय दिलाने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही है।









