नागपुर. लोककल्याणकारी न्याय के दृष्टिकोण से शासन स्तर पर लिए गए निर्णयों और विभिन्न समितियों की सिफारिशों पर प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक रूप से विचार होना चाहिए। इन सिफारिशों का सख्ती से पालन आवश्यक है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत विभिन्न विभागों के प्रशासन द्वारा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाए तो आयोग तक शिकायतें आने की संख्या कम हो सकती है। यह बात महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष एड. धर्मपाल मेश्राम ने कही। आयोग के समक्ष आई विभिन्न शिकायतों की संयुक्त सुनवाई आज आयोजित की गई। नागपुर में दर्ज शिकायतों पर बोलते हुए एड. मेश्राम ने शासन निर्णयों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने लाडपागे समिति की सिफारिशों के अनुसार सफाई कर्मचारियों के वारिसों को नौकरी, अन्य सरकारी लाभ, कोविड के कारण मृत व्यक्तियों के लिए अनुग्रह अनुदान और संबंधित लाभ, सेवानिवृत्ति के सभी लाभ, नगर निगम सफाई कर्मचारियों की पदोन्नति और बाधा उत्पन्न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई जैसे मामलों की सुनवाई की। इस सुनवाई में नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त अजय चारठाणकर, जिला सर्जन डॉ. निवृत्ती राठौड़, उपयुक्त विजया बनकर, उप शिक्षा अधिकारी निखिल भूयार, उपायुक्त विजय देशमुख, डॉ. दीपक सेलोकर और अन्य विभाग प्रमुख उपस्थित रहे। यह सुनवाई रविभवन में आयोजित की गई।
चलती ट्रेन में चढ़ती महिला का फिसला पैर, आरपीएफ कर्मचारी ने दौड़ कर बचाया; टली दुर्घटना
नागपुर: रेलवे सुरक्षा बल नागपुर पोस्ट द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन जीवन रक्षक” के अंतर्गत एक महिला यात्री की जान बचाने का साहसिक कार्य किया गया। यह घटना सोमवार शाम लगभग…










