नागपुर. की रहने वाली एम. के लिए होली का त्योहार खुशियों से भरा था, लेकिन उनके पति के लिए यह एक गंभीर समस्या लेकर आया। शुरुआत में उन्हें हल्का सिरदर्द हुआ, जो माइग्रेन जैसा लग रहा था। लेकिन कुछ दिनों बाद अचानक उन्हें तेज मिर्गी का दौरा पड़ा और वे गिर पड़े। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनका दाहिना हिस्सा कमजोर पड़ गया और वे बोलने में भी असमर्थ हो गए। परिवार ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों को पता चला कि उनके शरीर में पानी की भारी कमी (डिहायड्रेशन) हो गई थी। एमआरआई और अन्य जांचों से खुलासा हुआ कि उनके ब्रेन में सेरेब्रल वेनस साइनस थ्रॉम्बोसिस (CVST) नामक दुर्लभ लेकिन खतरनाक स्थिति विकसित हो चुकी थी। इस बीमारी में ब्रेन की नसों में ब्लड क्लॉट बनने लगता है, जिससे ब्रेन हेमरेज (दिमागी रक्तस्राव) का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने तुरंत खून पतला करने की दवाएं दीं, लेकिन उनकी हालत और बिगड़ती गई। लगातार मिर्गी के दौरे पड़ने लगे और स्थिति “स्टेटस एपिलेप्टिकस” में बदल गई, जो बेहद जानलेवा होती है। जब दवाओं से कोई सुधार नहीं हुआ, तो नागपुर के प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट और स्ट्रोक विशेषज्ञ डॉ. अमित भट्टी को बुलाया गया। डॉ. भट्टी ने पारंपरिक इलाज पर निर्भर न रहते हुए मेकैनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी नामक अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में सिर्फ 3 मिमी का छोटा छेद पैर की नस में किया गया और एक ट्यूब के जरिए ब्रेन तक पहुंचाकर ब्लड क्लॉट को हटा दिया गया। इस प्रक्रिया के कुछ घंटों के भीतर ही मरीज के मिर्गी के दौरे बंद हो गए, और सिर्फ 24 घंटे में उनका दाहिना हिस्सा फिर से काम करने लगा। बिना किसी बड़ी सर्जरी के, अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डॉ. भट्टी ने उनकी जान बचा ली। बाद में जांच में पता चला कि अत्यधिक काम, लगातार सफर और गर्मी के कारण उनके शरीर में पानी की कमी हो गई थी, जिससे खून गाढ़ा होकर ब्रेन की नसों में जम गया।सेरेब्रल वेनस साइनस थ्रॉम्बोसिस (CVST) एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक स्थिति है, जो कुल स्ट्रोक मामलों के 0.5-1% मामलों में पाई जाती है। यह समस्या युवाओं में बुजुर्गों की तुलना में ज्यादा देखने को मिलती है।
CVST के मुख्य कारण:
➡ डिहायड्रेशन (शरीर में पानी की कमी)
➡ गर्भनिरोधक गोलियां, गर्भावस्था में जटिलताएं, हॉर्मोनल थेरेपी (महिलाओं में ज्यादा खतरा)
➡ अत्यधिक शराब का सेवन, धूम्रपान, आनुवंशिक कारण, मोटापा
➡ शरीर में होमोसिस्टीन नामक तत्व का बढ़ना
➡ संक्रमित बीमारियां, ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां
गर्मी में बढ़ जाता है खतरा
गर्मी के मौसम में डिहायड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है। ज्यादा शराब पीने और शरीर में पानी की कमी के कारण खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे CVST का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
कैसे करें बचाव?
✅ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, खासकर गर्मी के दिनों में।
✅ ज्यादा शराब और धूम्रपान से बचें।
✅ अगर सिरदर्द, मिर्गी के दौरे, या अचानक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
समय पर इलाज से बच सकती है जान
डॉ. अमित भट्टी और उनकी टीम की समय पर की गई मेडिकल दखलअंदाजी ने मरीज की जान बचा ली। लेकिन अगर पहले ही सही सावधानी बरती जाती, तो इस गंभीर स्थिति से बचा जा सकता था। गर्मी में डिहायड्रेशन को हल्के में न लें और पानी की कमी से बचाव करें, ताकि ऐसी जानलेवा बीमारियों से बचा जा सके।











