Desk news. आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने और समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस साल भी गोटुल बहुउद्देश्यीय समिति, आरमोरी और आदिवासी छात्र संघ, तालुका शाखा द्वारा भव्य गोटुल महोत्सव का आयोजन किया गया। वडसा रोड स्थित गोटुल बहुउद्देश्यीय समिति के विशाल प्रांगण में इस महोत्सव ने आरमोरी के सांस्कृतिक माहौल को एक नई ऊंचाई दी। महोत्सव का उद्घाटन महाराष्ट्र राज्य के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोकजी उईके ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद और भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री अशोकजी नेते ने की।
इस अवसर पर गडचिरोली के विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, गडचिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. नामदेवराव किरसान, पूर्व विधायक कृष्णाभाऊ गजबे, पूर्व विधायक डॉ. नामदेवराव उसेंडी, विधायक रामदास मसराम, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांतजी वाघरे, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष महेंद्रभाऊ ब्राम्हणवाडे और जिला महामंत्री प्रकाशजी गेडाम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक गोंडी नृत्य की प्रस्तुति से हुई। आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा को दर्शाने वाले इस नृत्य को उपस्थित अतिथियों ने भरपूर सराहा। इस दौरान मंत्री और अन्य अतिथियों ने आदिवासी संस्कृति की विरासत और समाज जागरूकता में इस तरह के आयोजनों की भूमिका पर जोर दिया। 22 जनवरी को महोत्सव की शुरुआत आदिवासी देवताओं की महापूजा से हुई। इसके बाद कबड्डी, वॉलीबॉल प्रतियोगिता, रक्तदान शिविर और नि:शुल्क रोग निदान शिविर जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। 23 जनवरी को आदिवासी समाज जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। अध्यक्षीय भाषण में अशोकजी नेते ने आदिवासी समाज की प्रगति के लिए भाजपा द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा, “देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चयन भारतीय जनता पार्टी के आदिवासी प्रेम का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जनजाति गौरव दिवस’ मनाकर आदिवासी समाज का सम्मान बढ़ाया है और स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी वीरों के योगदान को उजागर करने के लिए स्मारकों की स्थापना की है।” आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोकजी उईके ने महोत्सव के उद्घाटन के दौरान राज्य के प्रत्येक जिले में सुसज्जित गोटुल केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “इन केंद्रों के माध्यम से आदिवासी समाज को शैक्षणिक और सांस्कृतिक प्रोत्साहन मिलेगा। आरमोरी में आगामी छह महीनों के भीतर गोटुल केंद्र की स्थापना की जाएगी।” गोटुल महोत्सव के सफल आयोजन में प्रा. दौलत धुवै, प्रा. दिलीप कुमरे, सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप घोडाम, सरपंच प्रदीप कुमरे, प्रभाकर हलामी और राजू परसा सहित कई लोगों का योगदान रहा।यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की प्रगति और जागरूकता का प्रेरणादायक स्रोत साबित हुआ।










