नागपुर. कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर और पुणे जैसे जिलों में 70 से 80 लाख लीटर तक दूध उत्पादन होता है, जबकि विदर्भ में भंडारा और गोंदिया को छोड़कर बाकी जिलों में दूध उत्पादन काफी कम है। लेकिन अब मदर डेयरी परियोजना के माध्यम से विदर्भ के किसानों के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने का सुनहरा अवसर आया है। किसानों को इस मौके का भरपूर लाभ उठाना चाहिए, ऐसा आवाहन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने रविवार (16 मार्च) को किया। मराठवाड़ा दुग्ध उत्पादक संघटन के शुभारंभ, धारा खाद्य तेल पैकिंग केंद्र के भूमिपूजन और मदर डेयरी के बुटीबोरी स्थित मेगा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के उद्घाटन के अवसर पर गडकरी ने अपने विचार रखे। यह कार्यक्रम तेलंगखेडी मार्ग स्थित मदर डेयरी प्लांट में आयोजित किया गया था। इस मौके पर एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह, मदर डेयरी फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स के मनीष बंदलिश, नेशनल डेयरी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक डॉ. सी.पी. देवानंद, मराठवाड़ा दुग्ध उत्पादक कंपनी की चेयरमैन वर्षा चौहान प्रमुख रूप से उपस्थित थीं। गडकरी ने कहा, “आज का दिन विदर्भ और मराठवाड़ा के लिए ऐतिहासिक है। 2016 से राज्य सरकार मदर डेयरी के साथ मिलकर दूध उत्पादन बढ़ाने और श्वेत क्रांति लाने के प्रयास कर रही है। विदर्भ में मुख्य फसलों की स्थिति खराब है। वर्धा, यवतमाल, अकोला, अमरावती, वाशीम और बुलढाणा जिलों में किसान आत्महत्याएं आम हो गई हैं, वहीं गढ़चिरौली नक्सलवाद से प्रभावित होने के कारण विकास से वंचित रहा है। लेकिन राज्य सरकार और मदर डेयरी के बीच हुए समझौते के बाद दूध उत्पादक किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मराठवाड़ा दुग्ध उत्पादक संघटन के माध्यम से विदर्भ की महिला किसान भी आत्मनिर्भर बनेंगी। साथ ही, उन्होंने विदर्भ में दूध उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। गडकरी ने कहा, “हरियाणा, पंजाब, गुजरात और राजस्थान से गायें लाने से स्थानीय किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। मदर डेयरी से जुड़े 35,000 किसानों को जागरूक करना होगा। अगर इनमें से हर किसान पांच अच्छी गायों को आधुनिक तकनीक से विकसित करता है, तो दूध उत्पादन में भारी बढ़ोतरी होगी।” उन्होंने मदर डेयरी से अनुरोध किया कि वे पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की मदद से विदर्भ में अच्छी नस्ल की स्थानीय गायों को विकसित करें। “मदर डेयरी को एंब्रियो ट्रांसफर और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम करना चाहिए। अगर इस तकनीक से प्रतिदिन 12 से 15 लीटर दूध देने वाली गायें विकसित होती हैं, तो महाराष्ट्र को बाहरी राज्यों से गायें लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” गडकरी ने मदर डेयरी से अपील की कि वह किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला पशु आहार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करे। उन्होंने सुझाव दिया कि विदर्भ में कपास की सरकी, तूर चूरी और मक्का प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कर जिलेवार पशुधन विकसित किया जाए और सस्ते दामों पर किसानों को पशु आहार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नेपियर घास के माध्यम से सालभर हरा चारा उपलब्ध कराया जाए, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि होगी। गडकरी ने मदर डेयरी से नागपुर की प्रसिद्ध संतरा बर्फी के मार्केटिंग पर भी ध्यान देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह बर्फी शुद्ध संतरे के पल्प से तैयार की जाएगी, जिससे विदर्भ के संतरा उत्पादक किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, गडकरी ने मदर डेयरी से गढ़चिरौली और वाशिम जैसे आकांक्षी जिलों में भी विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।










