नागपुर. राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक, दिव्यांग, आदिवासी, ओबीसी, महिला और असंगठित कामगारों के कल्याण के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है। वर्ष 2025-26 के लिए विभिन्न विभागों को हजारों करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। बौद्ध, जैन, सिख, पारसी, ईसाई, यहूदी और मुस्लिम जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के विकास के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। इसके साथ ही, अल्पसंख्यक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई है, जिसे आवश्यक वित्तीय सहायता दी जाएगी। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए छात्रवृत्ति, कृत्रिम अंग और उपकरण खरीदने की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा, स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता की योजना भी चलाई जा रही है। सरकार ने निर्णय लिया है कि जिला वार्षिक योजना में दिव्यांग कल्याण के लिए कम से कम 1% धनराशि आरक्षित रखी जाएगी। राज्य सरकार ने विभिन्न समाजों के उत्थान के लिए 18 महामंडल स्थापित किए हैं। इन महामंडलों की सभी योजनाओं को एक ही ऑनलाइन पोर्टल पर लाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी। असंगठित कामगार कल्याण आभासी महामंडल के माध्यम से 1.75 करोड़ असंगठित कामगारों और खेतिहर मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चलाई जाएंगी। संजय गांधी निराधार अनुदान योजना, श्रावणबाल सेवा राज्य निवृत्ति वेतन योजना और अन्य विशेष सहायता योजनाओं के तहत अब सभी लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में वित्तीय सहायता मिलेगी। बेटियों को आर्थिक सहायता देने के लिए “लेक लाडकी” योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अब तक 1.13 लाख लाभार्थियों को सहायता दी गई है। वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹50.55 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया गया है। लड़कियों की व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनके शिक्षा शुल्क और परीक्षा शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति की जाएगी। यह लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जो मान्यता प्राप्त उच्च और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेंगी और जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होगी।










