नागपुर. महाराष्ट्र सरकार ने समाज के विभिन्न वर्गों के विकास और कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अल्पसंख्यक समुदाय, दिव्यांगजन, असंगठित कामगार, वरिष्ठ नागरिक और महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। बौद्ध, जैन, सिख, पारसी, ईसाई, यहूदी और मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार ने अल्पसंख्यक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की है और इसके लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। दिव्यांग व्यक्तियों को छात्रवृत्ति, कृत्रिम अंग और उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, स्वरोजगार के लिए भी योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार ने दिव्यांग कल्याण के लिए जिला वार्षिक योजना में कम से कम 1% निधि आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने विभिन्न समाजों के उत्थान के लिए 18 महामंडल स्थापित किए हैं। इन महामंडलों की सभी योजनाओं को एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना बनाई गई है, जिससे लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग को 25,581 करोड़ रुपये, आदिवासी विकास विभाग को 21,495 करोड़ रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बहुजन कल्याण विभाग को 4,368 करोड़ रुपये, दिव्यांग कल्याण विभाग को 1,526 करोड़ रुपये और अल्पसंख्यक विकास विभाग को 812 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। असंगठित कामगार कल्याण आभासी महामंडल के माध्यम से 1.75 करोड़ असंगठित मजदूरों और खेत मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। संजय गांधी निराधार अनुदान योजना, श्रावणबाळ सेवा राज्य निवृत्ति वेतन योजना और अन्य विशेष सहायता योजनाओं का लाभ सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा किया जाएगा।बालिकाओं के कल्याण को ध्यान में रखते हुए ‘लेक लाडकी’ योजना के तहत अब तक 1.13 लाख लाभार्थियों को सीधा लाभ दिया गया है। वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना में 50.55 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाली लड़कियों के लिए शिक्षा शुल्क और परीक्षा शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति की जा रही है। यह लाभ उन छात्राओं को मिलेगा जो मान्यता प्राप्त उच्च और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश लेंगी और जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होगी। सरकार की इन पहलों से समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान में तेजी आने की उम्मीद है।










