चंद्रपुर. ताडाली एमआईडीसी स्थित सनविजय कंपनी प्रबंधन स्थानीय मराठी कामगारों को परेशान कर रहा था। एक मजदूर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसे इलाज देने के बजाय नौकरी से निकाल दिया गया। जब 10 अन्य कामगारों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया गया। इसके खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) कामगार सेना ने कंपनी के गेट के सामने ठिय्या आंदोलन किया। मनसे के आक्रामक आंदोलन और सहायक कामगार आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों की जांच के बाद कंपनी को झुकना पड़ा। आंदोलन के बाद कंपनी प्रबंधन ने तीन प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद सभी कामगारों की नौकरी बहाल कर दी गई, जिससे आंदोलन समाप्त कर दिया गया। यह जानकारी मनसे कामगार सेना के जिला अध्यक्ष अमन अंधेवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
कामगारों को मिला न्याय
अंधेवार ने बताया कि मनसे के आंदोलन की वजह से दुर्घटना में घायल हुए कर्मचारी स्वप्नील जोगी को मेडिकल खर्च और दो महीने का वेतन मिलेगा। पिछले सात दिनों से आंदोलन कर रहे मजदूरों को उन दिनों का वेतन भी दिया जाएगा। इसके अलावा, कंपनी को मजदूरों को न्यूनतम वेतन और पीएफ नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
परप्रांतीय मजदूर दीवार कूदकर भागे
मंगलवार को जब सहायक कामगार आयुक्त कार्यालय के अधिकारी फड कंपनी में जांच करने पहुंचे, तो वहां मौजूद बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के मजदूर 10-12 फीट ऊंची दीवार कूदकर भागने लगे। हालांकि, मराठी मजदूरों ने उन्हें पकड़ लिया।
आंदोलन में प्रमुख नेताओं की भागीदारी
इस सफल आंदोलन में मनसे कामगार सेना अध्यक्ष मनोज चव्हाण, जिला अध्यक्ष अमन अंधेवार, जिला उपाध्यक्ष राजू कुकडे, वाहतूक सेना जिलाध्यक्ष महेश वासलवार, उमाशंकर तिवारी, जनहित जिलाध्यक्ष रमेश काळबधे, सुनील गुढे, रोजगार स्वयंरोजगार जिलाध्यक्ष मनोज तांबेकर, व्यापारी सेना जिलाध्यक्ष महेश शास्त्रीकर, अजित कुमार पांडे और मोहम्मद फयाज समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। मनसे के इस आंदोलन के चलते सैकड़ों कामगारों को न्याय मिला और कंपनी प्रबंधन को उनकी मांगें माननी पड़ीं।










