नागपुर. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग 2030 तक करीब 4 करोड़ नौकरियों का सृजन करेगा। उन्होंने बताया कि जम्मू क्षेत्र में विश्व का लगभग 6% लिथियम भंडार पाया गया है, जिसका उपयोग 60 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों में लिथियम-आयन बैटरी के रूप में किया जाएगा। इससे बैटरी की लागत भी कम होगी। गडकरी नागपुर के राजनगर स्थित राष्ट्रीय अग्निशमन कॉलेज (एनएफएससी) में ‘इलेक्ट्रिक वाहनों में आग की घटनाओं का प्रबंधन’ विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में बोल रहे थे। इस मौके पर एनएफएससी के निदेशक एन. बी. शिंगणे भी उपस्थित थे।
ईवी बैटरियों की सुरक्षा पर शोध और सुधार गडकरी ने बताया कि पिछले 3 वर्षों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में आग लगने की 30 घटनाएं हुई थीं, जिससे ईवी बाजार पर असर पड़ा था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की विशेषज्ञ समितियों ने बैटरी सुरक्षा पर शोध कर आवश्यक सुधार किए हैं। अब ऑटोमोटिव इंडस्ट्रीज स्टैंडर्ड (एआईएस) के तहत बैटरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, और इलेक्ट्रिक बसों में फायर डिटेक्शन अलार्म अनिवार्य कर दिया गया है।
ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग नियम गडकरी ने बताया कि केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने 2022 में ईवी बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नियम बनाए थे। इन नियमों के तहत बैटरी निर्माण कंपनियों को बैटरी की रिकवरी और रीसाइक्लिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
हरित ईंधन का भविष्य गडकरी ने कहा कि हाइड्रोजन, एथेनॉल, सीएनजी, और इलेक्ट्रिक जैसे स्वच्छ और सस्ते ईंधन सुरक्षित परिवहन का भविष्य हैं। उन्होंने बताया कि कृषि अवशेषों, गन्ने की खोई, और अन्य जैविक उत्पादों से बायो-सीएनजी के 400 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 60 प्रोजेक्ट्स चालू हो चुके हैं। भंडारा जिले में चावल की भूसी से बायो-सीएनजी बनाने का प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है।
ईवी क्षेत्र में तेज़ी गडकरी के अनुसार, देश में अब तक लगभग 30 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। 2023-24 में ईवी की खरीद में 45% की वृद्धि हुई, और 2024 में कुल वाहन बाजार में ईवी का हिस्सा 6.4% हो गया। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में 56% का योगदान रहा।
स्टार्टअप्स का योगदान गडकरी ने बताया कि ईवी क्षेत्र में 400 से अधिक स्टार्टअप्स उभरे हैं, और 2025 तक हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार हिस्सा 8% से अधिक हो जाएगा। यह प्रगति भारत को स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।











