नागपुर. संतरा और मोसंबी की फसलों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था, लेकिन इसके बावजूद इन फसलों के नुकसान के पंचनामे नहीं किए गए थे। इसके लिए राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता और जिला परिषद सदस्य सलील देशमुख ने नागपुर में आंदोलन किया था। उनके इस आंदोलन के बाद पंचनामे करने के आदेश दिए गए थे। इसके साथ ही सलील देशमुख ने राज्य सरकार से सहायता की मांग की थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार ने संतरा और मोसंबी उत्पादकों के लिए प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की है। यह राशि किसानों के खातों में जमा की जा रही है। काटोल और नरखेड तालुकों में अत्यधिक बारिश के कारण संतरा और मोसंबी में फंगल रोग का प्रकोप हुआ था, जिससे इन फसलों का भारी नुकसान हुआ था। इस नुकसान का पंचनामा तत्कालीन महायुति सरकार ने नहीं किया था, जिसके कारण सलील देशमुख ने 20 अगस्त 2024 को नागपुर के संविधान चौक में आंदोलन किया और हेक्टेयर पर 50 हजार रुपये की सहायता की मांग की। इस आंदोलन में सलील देशमुख और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने पंचनामे करने के आदेश दिए। डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने सर्वेक्षण करके बताया था कि अत्यधिक बारिश के कारण फंगल रोग फैला था, जिसके कारण संतरा और मोसंबी की फसलें खराब हुई थीं। इसके बाद तलाठी, कृषि विभाग और ग्रामसेवक की टीम ने सर्वेक्षण करके रिपोर्ट तैयार की और इसे उपविभागीय अधिकारी को सौंपा। फिर यह रिपोर्ट जिलाधिकारी और विभागीय आयुक्त के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी गई थी। हालांकि, तब तक राज्य में सरकार बदल चुकी थी, लेकिन सलील देशमुख ने निरंतर अपनी मांग को लेकर प्रयास जारी रखा। उन्होंने वित्त मंत्री अजितदादा पवार से भी मुलाकात की थी। अंततः उनके प्रयासों का फल मिला और प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की गई। काटोल तालुका के लिए 19 करोड़ रुपये और नरखेड तालुका के लिए 28 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की गई है। यह सहायता किसानों के खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।










