Nagpur. वोक्हार्ट हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नितीन तिवारी ने मध्य भारत में पहली बार ‘मित्रा क्लिप’ प्रक्रिया द्वारा एक 57 वर्षीय मरीज की सफल सर्जरी की है। मरीज को गंभीर हृदय रोग से जूझते हुए अस्पताल लाया गया था। उसकी हृदय की पंपिंग क्षमता 25% से भी कम थी और माइट्रल वाल्व लीक (माइट्रल रेगुर्गिटेशन) हो रहा था। इसके साथ ही, हृदय की धड़कन बंद हो चुकी थी और दोनों फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो गया था। मरीज को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी और उसकी छाती के दोनों ओर पाइप लगाए गए थे। मरीज पिछले तीन महीने से कई अस्पतालों में भर्ती था, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। डॉ. तिवारी ने उसकी स्थिति स्थिर करने के लिए एआईसीडी (ऑटोमेटेड इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर) लगाया। इसके बाद उन्होंने माइट्रल वाल्व लीक को ठीक करने का निर्णय लिया, जो मरीज के हृदय की सूजन का कारण बन रहा था।
छाती खोलने के बिना हुआ उपचार
मरीज की कमजोर स्थिति और हृदय की कम पंपिंग क्षमता को देखते हुए छाती खोलकर सर्जरी करना संभव नहीं था। इसलिए डॉ. तिवारी ने ‘मित्रा क्लिप’ नामक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया का चयन किया। इस प्रक्रिया में कंठ या छाती खोलने की आवश्यकता नहीं होती। इसके बजाय, कंज़र्वेटिव तरीके से एक कैथेटर के माध्यम से माइट्रल वाल्व में छोटी क्लिप लगाई जाती है, जो वाल्व लीक को रोकती है और हृदय के सामान्य रक्त प्रवाह को बहाल करती है।
प्रक्रिया सफल, मरीज स्वस्थ
यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही, और मरीज को कुछ दिनों बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉ. तिवारी ने बताया कि हार्ट फेल्योर और माइट्रल वाल्व लीक वाले मरीजों को अक्सर थकावट, सांस लेने में दिक्कत, पैरों में सूजन, और व्यायाम करने में असमर्थता जैसी समस्याएं होती हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो ऐसे मरीजों में एक वर्ष से अधिक जीवित रहने की संभावना केवल 43% तक रह जाती है।
मध्य भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
डॉ. नितीन तिवारी ने बताया कि यह प्रक्रिया मध्य भारत में पहली बार की गई है। उन्होंने अपनी टीम के सहयोगियों, जिनमें डॉ. रवि बागली, डॉ. विनोद काशेटवार, श्री अमित मुखर्जी, और कैथ लैब स्टाफ शामिल हैं, का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे हृदय रोगियों के इलाज में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
क्या है ‘मित्रा क्लिप’ प्रक्रिया?
‘मित्रा क्लिप’ एक अत्याधुनिक प्रक्रिया है, जिसमें बिना हृदय को रोके और बिना चीर-फाड़ के माइट्रल वाल्व को ठीक किया जाता है। यह तकनीक हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।











