नागपुर. धंतोली स्थित ‘ने इस वर्ष 2024 में अपने 100 साल पूरे किए। इस ऐतिहासिक होटल की स्थापना 1924 में राजस्थान के डूंगरपुर से आए चार दोस्तों ने की थी। अपनी स्थापना के बाद से ही यह होटल स्वतंत्रता सेनानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया.
इस होटल का इतिहास बहुत ही समृद्ध और गौरवमयी है। यह वही होटल है जहां स्वयं महात्मा गांधी भी ठहरे थे। महात्मा गांधी के साथ कई प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, कलाकार और राजनेता भी यहां आकर रुके और भोजन का आनंद लिया। यह होटल अपनी विशिष्टता और ऐतिहासिक महत्व के कारण न केवल नागपुर के निवासियों के बीच बल्कि देशभर में प्रसिद्ध है। ‘आनंद आश्रम’ का एक प्रमुख आकगग्योग र्षण यहाँ का रवा डोसा है, जो इसे विशिष्ट पहचान दिलाता है। रवा डोसा की स्वादिष्टता और इसकी खासियत ने इसे स्थानीय और बाहरी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। इस होटल में कई कलाकार आकर गए हैं. जैसे निविक कूड़े,शरद तलवलकर, सुरेश भट, दादा कोंडके, रमेश देव्, सिमा, वितरी वेक, बाबूराहाफ व पेंढारकर, जॉज फर्नांडिस, पी.वी. नरसिंहगफग ह राव, महात्मा गाँधी जी ऐसे बहुत से मराठी कलाकार इस होटल में रहकर गए हैं। ‘आनंद आश्रम’ की स्थापना करने वाले चार दोस्तों ने न केवल एक होटल की नींव रखी थी, बल्कि एक ऐसा स्थान भी बनाया जहाँ स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों और समाज के प्रमुख व्यक्तियों का आना-जाना लगा रहा। इस होटल ने अपने 100 वर्षों के सफर में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी बना।
आज, 100 साल बाद भी ‘आनंद आश्रम’ अपने मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखते हुए शहरवासियों और आगंतुकों को सेवा प्रदान कर रहा है। इसका यह ऐतिहासिक सफर और इसके साथ जुड़ी कहानियाँ आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करती रहेंगी।













