चंद्रपुर. सावली के निवासियों ने सोमवार को वनभूमि पर स्टेडियम बनाने की मांग को लेकर मोर्चा निकाला। इस मुद्दे पर संयुक्त आदिवासी क्रियाशील समिति के जितेश कुलमेथे ने जिला प्रशासन से मांग की कि सरकारी वसतिगृह (छात्रावास) के लिए इस जमीन को उपलब्ध कराया जाए, जिससे आदिवासी छात्रों को शिक्षा के लिए रहने की सुविधा मिल सके। पत्रकार परिषद में कुलमेथे ने कहा, “स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी आदिवासी समाज शिक्षा व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में आदिवासी समाज पिछड़ा हुआ है। सावली तहसील के आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए कई बार जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, चर्चा की गई और भूख हड़ताल भी की गई। सरकारी छात्रावास के लिए सर्वे नंबर 797 और 798 की जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मोर्चे के बाद कुछ आदिवासी कार्यकर्ताओं को जान से मारने की धमकियां भी मिलीं। सरकारी आदिवासी छात्रावास की मांग को लेकर 19 से 24 दिसंबर 2024 के बीच सावली तहसील कार्यालय के बाहर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से भूख हड़ताल की गई। इस हड़ताल की गंभीरता को देखते हुए सांसद नामदेवराव किरसान, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी चौधरी, विकास राचलवार, प्रकल्प अधिकारी चंद्रपुर, एसडीओ चरडे और तहसीलदार प्रांजली चिरडे ने स्थल का दौरा किया और 30 दिसंबर को जिला प्रशासन के साथ बैठक कर कुछ मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया। बैठक में जिलाधिकारी ने भरोसा दिया कि आदिवासी समाज की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वे नंबर 797 और 798 वन विभाग के अंतर्गत आते हैं, लेकिन सरकारी आदिवासी छात्रावास के लिए जमीन देने की प्रक्रिया शुरू की गई है और यह अंतिम चरण में है। हालांकि, कुलमेथे ने आरोप लगाया कि सावली तहसील के कुछ जातिवादी लोग इस योजना को रोकने की कोशिश कर रहे हैं और हर स्तर पर इसे दबाने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में, अखिल भारतीय आदिवासी चंद्रपुर जिला युवा अध्यक्ष अतुल कोडापे, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के सावली तहसील अध्यक्ष प्रवीण गेडाम और उनके सहयोगियों को सोशल मीडिया, पानठेले और सार्वजनिक स्थानों पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। समिति ने मांग की कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और आदिवासी समाज को सुरक्षा प्रदान की जाए। संयुक्त आदिवासी क्रियाशील समिति ने प्रशासन से मांग की कि सरकारी नियमों के अनुसार भूमि की उचित जाँच कर आदिवासी समाज को न्याय दिया जाए और शासकीय छात्रावास के लिए यह जमीन आदिवासी प्रकल्प विभाग, चंद्रपुर को सौंप दी जाए। संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि पदाधिकारियों पर किसी भी तरह के हमले के लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पालक मंत्री अशोक उईके को पहले ही सूचित किया जा चुका है। इस पत्रकार परिषद में डॉ. देव कन्नाके, जितेश कुलमेथे, एड. भैयाजी उईके, अतुल कोडापे, कृष्णाजी मसराम, विजय कुमारे, दीपक पेंडोर और प्रवीण गेडाम उपस्थित रहे।










