नागपुर. विदर्भ साहित्य संघ के अमेय सभागार में साहित्यिक सुनील शिनखेडे की पुस्तक “निराकाराचे यात्रिक” का भव्य प्रकाशन संपन्न हुआ। यह पुस्तक 1890 से 1990 तक के कवियों की कविताओं का आस्वादात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वि.सा.संघ के अध्यक्ष प्रदीप दाते ने की, जबकि प्रमुख वक्ता लोकमान्य टिळक महाविद्यालय, वणी के प्राध्यापक डॉ. अजय देशपांडे थे। डॉ. देशपांडे ने पुस्तक को एक उत्कृष्ट आस्वादात्मक टिपण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक कवि और कविताओं के प्रति लेखक के संवेदनशील दृष्टिकोण का दर्पण है। उन्होंने इसे “आरसपानी लेखन” बताते हुए कहा कि यह लेखन पारदर्शी और सहज है, जिसमें कोई आग्रह नहीं है। बालकवि और अन्य कवियों पर लेखक की सूक्ष्म दृष्टि की प्रशंसा करते हुए उन्होंने इसे मराठी साहित्य के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान कहा। लेखक सुनील शिनखेडे ने बताया कि यह पुस्तक 36 प्रमुख कवियों और उनकी कविताओं का विश्लेषण है, जिसमें यशवंत, आरती प्रभु, विंदा करंदीकर, कवी ग्रेस, और विदर्भ के राजा बढे जैसे कवियों का समावेश है। उन्होंने यह पुस्तक अपने गुरु द. भी. कुलकर्णी को समर्पित की है।कार्यक्रम में समीक्षक संजय आर्वीकर और कवी प्रफुल शिलेदार ने पुस्तक के विश्लेषण की सराहना की। महाराष्ट्र टाइम्स के निवासी संपादक श्रीपाद अपराजित ने पुस्तक की सामग्री को गहराई से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन वृषाली देशपांडे ने किया और आभार प्रदर्शन चैतन्य शिनखेडे ने किया।










