नागपुर. भारत को कला का विशाल और समृद्ध वारसा प्राप्त है। इस कला के विकास के लिए कलाकारों को लोकाभिमुख दृष्टिकोण रखते हुए उत्कृष्ट कार्य करना चाहिए, ऐसा आवाहन केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अच्छा कार्य कर रही है। महाराष्ट्र राज्य कला संचालनालय द्वारा यहां स्थित शासकीय कला और अभिकल्प महाविद्यालय में आयोजित 64वें महाराष्ट्र राज्य कला प्रदर्शनी 2024-25 का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों हुआ। इस मौके पर कला संचालनालय के निदेशक डॉ. संतोष क्षीरसागर, उपसंचालक विनोद दांडगे, शासकीय कला और अभिकल्प महाविद्यालय के अधिष्ठाता विश्वनाथ साबले आदि उपस्थित थे। कला जाति, धर्म और पंथ का भेद किए बिना समाज की सशक्त सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाती है। कला निरंतर विकसित होती रहती है। कलाकारों को लोकाभिमुख दृष्टिकोण से उत्कृष्ट कार्य करते हुए इस कला धरोहर को आगे बढ़ाना चाहिए, ऐसा केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि कलाकारों को अवसर और प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है। महाराष्ट्र सरकार का कला संचालनालय 1956 से राज्य कला प्रदर्शनी के माध्यम से कलाकारों को अवसर प्रदान कर रहा है, जिससे उभरते हुए कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है। सरकार का यह कदम सराहनीय है। उन्होंने नागपुर की समृद्ध कला परंपरा पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर शासकीय कला और अभिकल्प महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक नंदकिशोर मानकर और उनकी पत्नी का सम्मान भी किया गया। साथ ही सात कला विधाओं में 31 कलाकृतियों को पुरस्कार और 34 कलाकृतियों को गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। दिव्यांग विद्यार्थियों की कलाकृतियों को विशेष पुरस्कार दिए गए। कला संचालनालय के माध्यम से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों, निम-शासकीय और शासकीय मान्यता प्राप्त कला संस्थाओं में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने और उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए 1956 से राज्य के विभिन्न भागों में राज्य कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष नागपुर में आयोजित प्रदर्शनी के लिए 4 शासकीय, 31 अनुदानित और 178 गैर- अनुदानित कला संस्थाओं से 3,234 विद्यार्थियों ने कुल 4,744 कलाकृतियां भेजी थीं, जिनमें से 993 कलाकृतियां प्रदर्शनी के लिए चयनित हुईं। प्रारंभ में डॉ. संतोष क्षीरसागर ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान 64वें राज्य कला प्रदर्शनी स्मारिका का भी विमोचन किया गया।










