Nagpur. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। नई गाइडलाइन के अनुसार अब देशभर के सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा 5 तक की पढ़ाई मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा या स्थानीय भाषा में कराई जाएगी। मंत्रालय का दावा है कि इससे बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत होगी और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
मुख्य बिंदु:
कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में अनिवार्य होगी।
अंग्रेज़ी को वैकल्पिक भाषा के रूप में सिखाया जा सकता है, लेकिन माध्यम मातृभाषा ही रहेगा।
यह नियम 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा।
राज्यों को अपने अनुसार भाषा चयन की स्वतंत्रता दी गई है।
शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे ताकि वे क्षेत्रीय भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकें।शिक्षाविद् प्रो. आर.के. मिश्रा ने कहा, “मातृभाषा में शिक्षा देने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे जटिल विषयों को भी बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।” कुछ अभिभावकों ने चिंता जताई है कि बाद में अंग्रेज़ी माध्यम में स्विच करने में बच्चों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि उच्च कक्षाओं में द्विभाषिक मॉडल अपनाया जाएगा।










