यवतमाल. महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के आर्णी तालुका स्थित कारेगांव की पारधी आदिवासी बस्ती के निवासी आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे हैं। पक्की सड़क न होने से बारिश के मौसम में मरीजों और ग्रामीणों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। इस बार की अतिवृष्टि के कारण कई कच्चे घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पक्की सड़क, पीने के पानी की सुविधा और घरकुल योजना के तहत नए मकान बनाने की मांग की है। स्थानीय निवासी किरण पवार ने बताया कि गांव को जोड़ने वाला कोई पक्का रास्ता नहीं है, जिससे बरसात के दिनों में आवाजाही बेहद कठिन हो जाती है। कीचड़ और पानी के कारण बच्चों का स्कूल जाना, मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और दैनिक ज़रूरतों के लिए बाज़ार जाना लगभग असंभव हो गया है। जोरदार बारिश ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे कुछ परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय महिला पूजा चव्हाण ने कहा, “न सड़क है, न पानी की सुविधा, और अब बारिश ने हमारे घर भी तोड़ दिए। प्रशासन हमें बुनियादी सुविधाएं दे, ताकि हम सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।” गर्मी के मौसम में महिलाओं को पीने के पानी के लिए 2-3 किलोमीटर दूर पुरानी कुओं तक जाना पड़ता है, जहां एक बाल्टी पानी के लिए 10 महिलाओं को कतार में लगना पड़ता है। बारिश में कीचड़ भरे रास्तों से होकर मरीजों को ले जाना जानलेवा हो जाता है। ग्रामीणों ने इन समस्याओं पर तत्काल उपायों की मांग की है। इस विषय में यवतमाल जिले के सहायक जिलाधिकारी अमित रंजन और पुसद एकात्मिक विकास प्रकल्प अधिकारी अमोल मेटकर से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने इन समस्याओं की गंभीरता को समझते हुए कारेगांव बस्ती का निरीक्षण करने के लिए टीम भेजने का आश्वासन दिया है। साथ ही, अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त घरों का पंचनामा कर पात्र परिवारों को घरकुल योजना के तहत सहायता देने की योजना भी बनाई जा रही है।
आदिवासी विकास निधि का दुरुपयोग?
इस पृष्ठभूमि में, आदिवासी विकास विभाग की निधि के दुरुपयोग का गंभीर आरोप सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट के अनुसार, सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग के लिए मंजूर 3,960 करोड़ में से 410.30 करोड़ रुपये, और आदिवासी विकास विभाग के 3,420 करोड़ में से 335.70 करोड़ रुपये “लाडकी बहन योजना” व अन्य योजनाओं में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। यह निधि पारधी और अन्य आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए थी, लेकिन उसके diverted हो जाने से समुदाय के विकास को ठेस पहुंची है, ऐसा आरोप आदिवासी पारधी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष अनिल पवार ने लगाया है।
सरकार की चुप्पी, समाज में नाराजगी
परिषद के प्रदेश युवा अध्यक्ष आतिश पवार ने कहा, “हमारे समाज को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है और जो योजनाएं हमारे लिए बनी हैं, उनका पैसा कहीं और भेज दिया जाता है। यह अन्याय है।” कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने सरकार की उदासीनता पर कड़ा रोष व्यक्त किया है और तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
आगे क्या?
आदिवासी विकास विभाग ने वर्ष 2024-25 के लिए 213.94 करोड़ रुपये अनिवार्य खर्च हेतु तथा कुल 15,360 करोड़ रुपये की योजना निधि घोषित की है, जिसमें सरकारी छात्रावास, छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। लेकिन इन योजनाओं के क्रियान्वयन और निधि के वितरण को लेकर पारदर्शिता नहीं होने का आरोप भी परिषद की ओर से किया गया है। आदिवासी सेवक व परिषद के विदर्भाध्यक्ष बबन गोरामन ने कहा कि, “सरकार को इन समस्याओं पर तुरंत ध्यान देकर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, निधि के दुरुपयोग की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।” अब यह देखना होगा कि सरकार इस विषय को कितनी गंभीरता से लेती है और पारधी समाज के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। इस पर ही इस वंचित समाज का भविष्य निर्भर करेगा।










