Desk News. तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर हिंदुओं के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और चार धामों में से एक माना जाता है। अद्वितीय वास्तुकला, 1000 से अधिक स्तंभों वाले गलियारे और समुद्र से निकटता इसे धार्मिक और स्थापत्य की दृष्टि से विशिष्ट बनाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका विजय प्राप्त की, तब उन्होंने ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करने का निश्चय किया। इसके लिए हनुमान जी कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने गए, लेकिन देर होने पर माता सीता ने बालू से एक शिवलिंग बनाया और भगवान राम ने उसी की पूजा की। बाद में हनुमान द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी वहां स्थापित किया गया। ये दोनों शिवलिंग आज भी मंदिर में पूजित हैं – रामलिंगम और विशलिंगम। यह मंदिर हिंदू धर्म के उन विरले स्थलों में से एक है जहाँ भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम द्वारा भगवान शिव की पूजा की गई। धार्मिक मान्यता है कि यहां स्नान करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। मंदिर के प्रांगण में 22 तीर्थकुंड (जलकुंड) हैं, जिनमें स्नान को मोक्षप्रदायक माना गया है। रामनाथस्वामी मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं और अध्यात्म की अनुभूति प्राप्त करते हैं।












