नागपुर. राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों के शिक्षकों को अब भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित शिक्षा दी जाएगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा से अवगत कराने हेतु यह विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इस उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने जगद्गुरु श्री देवनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंस एंड रिसर्च (JSDIVSR) के साथ 9 अप्रैल 2025, बुधवार को एक सामंजस्य करार (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कार्यक्रम जमनालाल बजाज प्रशासनिक भवन के सभागृह में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में माननीय प्रभारी कुलगुरु डॉ. माधवी खोडे चवरे (भाप्रसे), कुलसचिव डॉ. राजू हिवसे, आईआईएल निदेशक डॉ. निशिकांत राऊत, JSDIVSR के कोषाध्यक्ष श्री निरंजन देशकर, एमडीडी के सचिव श्री प्रकाशराव कावळे, संस्थान के निदेशक आचार्य श्रेयस कुऱ्हेकर एवं बोर्ड मेंबर अनुराग देशपांडे की प्रमुख उपस्थिति रही। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय एवं इससे संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को एक वर्ष तक भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित जानकारी देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। NEP 2020 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशानिर्देशों के अनुसार, स्नातक पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित 2 क्रेडिट का एक पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करने हेतु यह शिक्षक विकास कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह पहल उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता व प्रोत्साहन को बढ़ावा देगी। पाठ्यक्रम की संरचना, प्रशिक्षकों की नियुक्ति एवं तकनीकी पहलुओं का जिम्मा JSDIVSR द्वारा संभाला जाएगा। अंजनगांव सुर्जी (जिला अमरावती) स्थित श्री देवनाथ मठ के अधिपति आचार्य स्वामी श्री जितेंद्रनाथ महाराज के मार्गदर्शन में कार्यरत यह संस्था वैदिक विज्ञान एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान और वर्तमान शैक्षणिक आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना है। यह प्रयास भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनरुद्धार की










