बेंगलुरु. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (अभाप्रस) की वार्षिक बैठक 21 से 23 मार्च तक जनसेवा विद्या केंद्र, चन्ननहल्ली (कर्नाटक) में आयोजित होगी। यह संघ की सबसे महत्वपूर्ण बैठक मानी जाती है। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि इस बार बैठक में संघ स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर विचार-विमर्श होगा। इस अवसर पर दक्षिण मध्य क्षेत्र कार्यवाह एन. तिप्पेस्वामी, सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार और प्रदीप जोशी भी मौजूद रहे। बैठक का उद्घाटन संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले करेंगे। प्रारंभ में संघ कार्य की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इस बार दो प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा होगी— 1. बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और इसके समाधान। 2. संघ की 100 वर्षों की यात्रा, शताब्दी वर्ष की योजनाएं और भविष्य की दिशा। संघ की स्थापना का शताब्दी वर्ष विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक मनाया जाएगा। इसके तहत व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। साथ ही, पंच परिवर्तन (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण जागरूकता, स्वत्व पर जोर और नागरिक कर्तव्य) पर भी विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी. संघ की इस बैठक में वीर योद्धा रानी अब्बक्का की 500वीं जयंती पर विशेष वक्तव्य जारी किया जाएगा। रानी अब्बक्का का जन्म 1525 में कर्नाटक में हुआ था और उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों से वीरतापूर्वक संघर्ष किया था।
संघ आयोजित करेगा 95 प्रशिक्षण वर्ग
संघ इस वर्ष 95 प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करेगा, जिनमें—
40 वर्ष से कम आयु के लिए 72 वर्ग होंगे।
40 वर्ष से अधिक आयु के लिए 23 वर्ग होंगे।
इस तीन दिवसीय बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य और देशभर के प्रतिनिधि शामिल होंगे।










