नागपुर. ग्रामीण इलाकों में कृषि से जुड़े पशुपालन, पक्षी पालन और मत्स्य पालन उद्योग को अधिक स्थायी बनाना है, तो जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए पशुओं के पोषण और आहार का सटीक प्रबंधन अनिवार्य है। इसके साथ ही ग्रामीण परिवारों को खाद्य सुरक्षा और कृषि आधारित उद्योगों से बेहतर आय के साधन प्रदान करने के लिए शोधकर्ताओं को आगे आना होगा। यह अपील पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने की। मुंडे नागपुर में महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वैश्विक पशु आहार विज्ञान सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रही थीं। यह आयोजन नागपुर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के रजत जयंती सभागार में किया गया। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. रामास्वामी एन., भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, पशु विज्ञान विभाग के उपमहानिदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्ट, कुलपति डॉ. नितिन पाटिल, पशुपालन विभाग के आयुक्त डॉ. प्रविणकुमार देवरे और वरिष्ठ शोधकर्ता उपस्थित थे। मुंडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमें पशुधन, वन संरक्षण, पर्यावरण और सतत जीवनशैली के लिए एक अनमोल धरोहर दी है। हमारे देवी-देवताओं ने भी पशुओं को महत्व दिया है। परंपराओं और ज्ञान के आधार पर हमारे पूर्वजों ने कृषि को पशुधन से जोड़ा और अतिरिक्त उत्पादकता हासिल की। आज हम दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर हैं और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा विज्ञान में ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की नई दिशा देने की क्षमता है। बढ़ती जनसंख्या के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध, मांस और अंडे उपलब्ध कराने के साथ उनके पोषक तत्वों को बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है। मुंडे ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में शोध की व्यापक संभावनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि पशुओं के आहार प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, वजन वृद्धि, पोषण सुधार और जल प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में शोध की जरूरत है। उन्होंने ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और इन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. रामास्वामी एन. ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में यह उनका सबसे आनंददायक क्षण है क्योंकि उनका भी अध्ययन इसी क्षेत्र से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से शोधकर्ताओं के प्रयासों से एक उज्ज्वल मार्ग प्राप्त होगा। कुलपति डॉ. नितिन पाटिल ने अपने संबोधन में पर्यावरण संतुलन और कृषि आधारित उद्योगों के लिए इस सम्मेलन को महत्वपूर्ण बताया। समारोह के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिकों का सम्मान भी किया गया।











