Desk news. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिया कि सावित्रीबाई फुले की द्विशताब्दी, जो पांच साल बाद मनाई जाएगी, से पहले उनका स्मारक तैयार हो जाना चाहिए। इसके लिए प्रशासन को 10 एकड़ भूमि का अधिग्रहण तुरंत करने को कहा गया है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस भव्य स्मारक के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। यह बात मुख्यमंत्री ने सावित्रीबाई फुले की 194वीं जयंती के अवसर पर ग्राम विकास विभाग और सातारा जिला परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही। यह आयोजन नायगांव, तहसील खंडाला में हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, मंत्री शंभूराज देसाई, जयकुमार गोरे, पंकजा मुंडे, आदिति तटकरे और कई अन्य मंत्री एवं अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा, “महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने समाज को विकास की दिशा दिखाई। उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को स्वावलंबी और सक्षम बनाना ही उनका जीवंत स्मारक होगा। महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने के बाद महिला नेतृत्व का एक नया युग शुरू होगा। केंद्र सरकार की ‘लखपति दीदी’ योजना के जरिए 50 लाख महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।” उन्होंने आगे कहा, “सावित्रीबाई फुले ने उस समय शिक्षा की ज्योति जलाई, जब महिलाओं को समाज में गुलामों की तरह扱ा जाता था। उन्होंने विधवाओं की केशवपन प्रथा और बालहत्या का विरोध किया और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया। उनके कार्यों का स्मारक सिर्फ एक मूर्ति नहीं बल्कि उनके विचारों को भी समाहित करना चाहिए।” ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने कहा, “सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाने का कार्य किया। उनके जन्मस्थल नायगांव को मैं दत्तक लेता हूं और इसे एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। स्मारक निर्माण के लिए 125 करोड़ रुपये आवंटित करने और 10 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने की जरूरत है।” इस मौके पर अन्य मंत्रियों और विधायकों ने भी फुले दंपति के कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सावित्रीबाई फुले के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और विकास योजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें जल जीवन मिशन के तहत वॉटर एटीएम, महिला बचत समूहों के उत्पाद स्टॉल, और अन्य परियोजनाएं शामिल थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और अधिकारी मौजूद थे।










