Desk News. विधानसभा चुनाव में 230 सीट के साथ बहुमत में पहुंची महायुति के मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। 26 नवंबर को ही विधानमंडल का कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर कोई निर्णय नहीं लेने के कारण उलझनें बढ़ गई हैं। चर्चा है कि जब तक मुख्यमंत्री पद के नाम पर सहमति नहीं बनती, तब तक विधायक दल के नेता का भी चयन नहीं होगा। ऐसे में अब सस्पेंस गहराता जा रहा है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इसके लिए जल्दबाजी नहीं करेगा। राजस्थान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम तय करते समय पार्टी ने करीब 10 से 15 दिन का समय लगाया था। इसे देखते हुए महाराष्ट्र में भी इंतजार करने के संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, एक दिसंबर को मार्ग शीर्ष अमावस्या है। इस घोषणा में यह भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। ऐसे में शुभ दिन देख पार्टी द्वारा इसकी घोषणा की जाएगी। हालांकि चर्चा यह भी है कि जैसे ही आम सहमति बनती है, पार्टी नाम की घोषणा कर देगी। अमावस्या खत्म होते ही शपथ-ग्रहण समारोह हो सकता है। फिलहाल शिवसेना और भाजपा ने अपना अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए मंदिरों में प्रार्थना, हवन और यज्ञ शुरू कर दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री पद पर आम सहमति बनती नहीं दिख रही है। चर्चा है कि भाजपा और शिवसेना में मुख्यमंत्री पद को लेकर एकमत नहीं हो पा रहा है। शिंदे गुट अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए दबाव तैयार कर रहा है तो भाजपा चाहता है कि महायुति को सर्वाधिक सीट पर जीत दिलाने वाले देवेंद्र फडणवीस को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। इसके लिए नागपुर सहित विदर्भ के सभी भाजपा विधायक मुंबई में डेरा डाले हुए हैं। वे फडणवीस के पक्ष में एकजुट हो गए है।
बैठक का इंतजार
प्रचंड बहुमत मिले महायुति को 3 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक सरकार गठन की स्थिति साफ नहीं हो पाई है। विधायक इस उम्मीद में मुंबई पहुंचे थे कि तुरंत में विधायक दल की बैठक होगी और नेता चुना जाएगा। लेकिन उलझन भरी स्थिति होने से बैठक कब होगी, अब यहीं चर्चा का विषय बन गया है। विदर्भ से पहुंचे सभी विधायक इंतजार करने की बात कह रहे हैं।










