नागपुर . विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच पोस्टर वॉर ने राजनीति को और गरमा दिया है। शहर के कई विचारधाराओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भाजपा नेताओं के नामी गिरामी पोस्टर सामने आए हैं। इन पोस्टरों में दोनों नेताओं के खिलाफ़ आरोप लगाए गए हैं, जिसमें राजनीतिक तानाशाही का आरोप लगाया गया है। राहुल गांधी के नेतृत्व की क्षमता और कंपनियों की कंपनियों पर कब्जे के सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि, पोस्टर लेआउट मौजूद हैं, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इस घटना में भर्ती और नियुक्त दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया गया है। कांग्रेस ने बीजेपी पर पोस्टर वॉर के जरिए ध्यान भटकाने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने इसे मजबूती की कमी बताया। इस मामले में पूरे नागपुर की जनता की राय मिली-जुली है। कुछ लोगों का मानना है कि यह वामपंथी राजनीति का हिस्सा है, जबकि अन्य इसे केवल राजनीतिक प्रचार का साधन मानते हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे पोस्ट वॉर्म और तेज़ हो सकते हैं। सवाल यह है कि यह क्या है कि यह किस तरह से किसी प्रभावशाली व्यक्ति को प्रभावित करने का जरिया बन सकता है या यह सिर्फ एक प्रचार रणनीति है? इन पोस्टरों का प्रभाव क्या है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।










