नागपुर. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त केंद्रीय सशक्तता समिति के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल और सुनिल लिमये ने नागपुर क्षेत्र में स्थित झुडपी जंगलों के मुद्दे पर आढावा लिया। इस संदर्भ में समिति सर्वोच्च न्यायालय को जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। नागपुर विभागीय आयुक्त कार्यालय के सभागृह में, जहां झुडपी जंगलों के कारण विकास कार्यों में आ रही रुकावटों पर चर्चा की गई, समिति के सदस्यों ने सभी संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। बैठक में विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी, वन विभाग के प्रधान वनसंरक्षक नरेश झुरमुरे, विभाग के सभी जिल्हाधिकारी, राजस्व और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। झुडपी जंगलों से संबंधित भूमि पर वनसंवर्धन कानून लागू होने के कारण विभिन्न विकास कार्यों में रुकावटें आ रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर आढावा लेने के लिए केंद्रीय सशक्तता समिति गठित की थी और समिति से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। समिति ने जिलेवार आढावा लेकर वस्तुस्थिति का अध्ययन किया और कुछ स्थानों पर भौतिक निरीक्षण भी किया। समिति अब अगले एक महीने में अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत करने की योजना बना रही है। केंद्रीय सशक्तता समिति के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल और सुनिल लिमये ने रिकॉर्ड में नोंद की गई जानकारी और संबंधित दस्तावेजों की भी समीक्षा की। विभागीय आयुक्त श्रीमती विजयलक्ष्मी बिदरी ने समिति को जिल्हानिहाय स्थिति का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में सहायक आयुक्त श्रीमती इंदिरा चौधरी ने झुडपी जंगलों के बारे में विभागीय स्थिति की जानकारी दी। बैठक में जिले के जिल्हाधिकारी विनय गौडा (चंद्रपूर), डॉ. संजय कोलते (भंडारा), अविशांत पंडा (गडचिरोली), प्रजित नायर (गोंदिया), वान्मथी सी. (वर्धा), नागपुर के अपर जिल्हाधिकारी तुषार ठोंबरे और राजस्व उपायुक्त राजलक्ष्मी शहा ने भी झुडपी जंगलों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी।











