नागपुर. संस्कृत भाषा का विकास और संरक्षण हमेशा राजा, धर्म और जनता के समर्थन पर निर्भर रहा है। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह भाषा इन तीनों का पर्याप्त सहयोग प्राप्त करने से वंचित रही है। विदर्भ प्रांत के पूर्व मंत्री डॉ. संभाजी पाटिल ने संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने की अपील करते हुए कहा कि अब इसे राजकीय संरक्षण प्राप्त हो चुका है, इसलिए समाज का भी दायित्व है कि वह इसे बढ़ावा दे। शिक्षण क्षेत्र को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। संस्कृत भारती, नागपुर महानगर द्वारा आयोजित ‘सरल संस्कृत परीक्षा’ के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन हाल ही में मुंडले प्लेटिनम जुबली हॉल में बड़े उत्साह के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जामदार विद्यालय शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष दिलीप भराड़े उपस्थित थे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संभाजी पाटिल ने समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नागपुर महानगर के अध्यक्ष विलास काले ने की। इस अवसर पर मंच पर विदर्भ प्रांत अध्यक्ष रमेश मंत्री, विदर्भ प्रांत मंत्री श्रीनिवास वर्णेकर, नागपुर महानगर मंत्री केतकी डांगे एवं विद्यालय प्राचार्य कृष्ण कुमार देशकर भी उपस्थित रहे। समारोह में विजेता विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस दौरान अपने संबोधन में डॉ. संभाजी पाटिल ने कहा कि संस्कृत के क्षेत्र में तीन प्रकार के लोग कार्यरत हैं — संस्कृत प्रेमी, संस्कृत कार्यकर्ता और संस्कृतकर्मी। उन्होंने आग्रह किया कि संस्कृत प्रेमियों और कार्यकर्ताओं का यह दायित्व बनता है कि वे इस भाषा को केवल संस्कृतकर्मियों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे समाज के हर वर्ग तक पहुँचाएँ। इसमें शिक्षकों की विशेष भूमिका होगी। मुख्य अतिथि दिलीप भराड़े ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। समारोह के प्रारंभ में विद्यालय प्राचार्य कृष्ण कुमार देशकर ने ‘सरल संस्कृत परीक्षा’ की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन अनघा पेंडके और अश्विनी पिंपलापुरे ने किया, जबकि अतिथियों का परिचय पवनीकर ने कराया और धन्यवाद ज्ञापन केतकी डांगे ने किया। इस अवसर पर न्यू इंग्लिश एजुकेशन इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष यशवंत खरे, पं. बच्छराज के संरक्षक उपेंद्र जोशी, महिला शिक्षा उन्नयन मंडल के अध्यक्ष रविंद्र फडणवीस, आदर्श विद्या मंदिर गांधीबाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल सारडा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम ने संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा और समाज को इसे और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।










