नागपुर. हजारों वर्षों से गंगा का प्रवाह प्रतिदिन नया और शुद्ध प्रतीत होता है। सनातन विचार गंगा की धारा की तरह पवित्र और नवीनता व परंपरा का संगम है। इसी तरह, हमारी संस्कृति और परंपराओं से प्राप्त मूल्य और विचार नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। “बनाएं जीवन प्राणवान” पुस्तक के माध्यम से इन मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का कार्य मुकुल कानिटकर जैसे व्यक्तित्व कर रहे हैं। यह बात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही। मुख्यमंत्री फडणवीस नागपुर के कवि सुरेश भट सभागार में आयोजित “बनाएं जीवन प्राणवान” पुस्तक की दूसरी आवृत्ति के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर श्रीमद जगदगुरु शंकराचार्य कूडली श्रृंगेरी महासंस्थान के 72वें पीठाधीश अभिनव शंकर भारती महास्वामी जी, लेखक मुकुल कानिटकर, प्रकाशक देवेंद्र पवार सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे। फडणवीस ने कहा कि भारत को महान परंपरा और समृद्ध संस्कृति का वरदान प्राप्त है। सिंधु सभ्यता के अवशेष 9 से 10 हजार वर्ष पहले की परिपूर्णता को दर्शाते हैं। उस समय भारत के पास ऐसी व्यवस्थाएं थीं जो पश्चिमी देशों में नहीं थीं। हमारी परंपराओं और जीवनशैली ने समृद्धि, ज्ञान, विवेक और विज्ञान का संगम प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी परंपराओं और मूल्यों को खत्म करने का प्रयास किया। हमारे समृद्ध होने के कारण हम पर कई आक्रमण हुए। उस समय भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा 30% से अधिक और जीडीपी 28-29% थी। उन्होंने कहा कि हमारे स्थापत्य शास्त्र में सांडपानी प्रबंधन जैसी उन्नत व्यवस्थाएं थीं। यह समृद्धता हमारी सनातन परंपरा से विकसित हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीयों ने अपनी परंपराओं के शाश्वत मूल्यों को स्वीकारते हुए उन्हें समयानुसार परिवर्तित करने का साहस दिखाया है। इस सांस्कृतिक धरोहर में विज्ञान और विवेक निहित हैं। हमारी संस्कृति का उद्देश्य विश्व पर शासन करना नहीं, बल्कि मानवता का उत्थान करना है। उन्होंने कहा कि मुकुल कानिटकर की यह पुस्तक नई पीढ़ी को जागरूक करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे हर व्यक्ति तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। श्रीमद जगदगुरु शंकराचार्य कूडली श्रृंगेरी महासंस्थान के 72वें पीठाधीश श्री श्री अभिनव शंकर भारती महास्वामी जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन परंपरा विवेक और संवेदनशीलता पर आधारित है। धर्मशास्त्र पढ़े बिना भी यह संस्कृति हमारे व्यवहार में दिखती है। इस अवसर पर प्रकाशक देवेंद्र पवार ने कहा कि भारत की हर छोटी से छोटी चीज में अनुभव और ज्ञान है। दगड़ में भी प्राण होने का भाव हमारी सभ्यता की विशेषता है। लेखक मुकुल कानिटकर ने कहा कि हमें जो परंपराएं विरासत में मिली हैं, उनका मूल्य असीमित है।










