नागपुर. क्राइम ब्रांच की एंटी व्हीकल थेफ्ट टीम ने वाहन चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने 6 मामलों को सुलझाया, 11 चार पहिया वाहन बरामद किए, जिनकी कुल कीमत लगभग 1.50 करोड़ रुपये है। इस कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने तहसील थाना क्षेत्र में एक संदिग्ध कार (नं. एमपी 04 EE 2026) का पता लगाया। जांच में पाया गया कि वाहन के इंजन और चेसिस नंबर में गड़बड़ी थी। असल में यह गाड़ी (एचआर 10 एटी 3055) एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के नाम पर पंजीकृत थी। आरोपी शाहीद इकबाल उर्फ चिंटू (39) और उसके साथी सौरभ अहिरवार (36) ने इस वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर इस्तेमाल किया। पूछताछ के बाद पता चला कि वे गाड़ियों को फर्जी नंबर प्लेट लगाकर दूसरे राज्यों में बेचते थे। पुलिस ने इनसे कुल 28 वाहन बरामद किए, जिनकी कीमत 98 लाख रुपये है। जांच में पता चला कि आरोपी वाहन चोरी के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। गाड़ियों को अनलॉक करने के लिए डिवाइस और फर्जी चाबियां तैयार करते थे। इसके बाद वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट और फास्टैग लगाकर उन्हें असम, मणिपुर और अन्य राज्यों में बेचते थे। 24 अक्टूबर 2024 को एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मध्यप्रदेश में नाकाबंदी कर दो अन्य आरोपियों गुरविंद्र सिंह लायश्रम (27) और अतिसिन इगो तापक्रम (38) को गिरफ्तार किया। इनके पास से 3 वाहन बरामद किए गए. इस ऑपरेशन का नेतृत्व नागपुर के पुलिस आयुक्त रविंद्र कुमार सिंघल, सह पुलिस आयुक्त निसार तांबोली, अपर पुलिस आयुक्त संजय पाटिल, और डीसीपी राहुल माकणीकर के मार्गदर्शन में किया गया। एसीपी अभिजीत पाटिल, इंस्पेक्टर सुहास चौधरी और उनकी टीम ने सटीक योजना और कार्रवाई से इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। पुलिस टीम ने न केवल चोरी के वाहन बरामद किए बल्कि गाड़ियों के सॉफ्टवेयर में की गई छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए किए जा रहे अपराध को भी उजागर किया। इस सफलता से नागपुर में वाहन चोरी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।










