नागपुर. विश्वविद्यालय सिर्फ ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि सभी कलाओं का संगम है,” यह उद्गार राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु डॉ. प्रशांत बोकारे ने नागपुर फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए। विश्वविद्यालय और नागपुर चलचित्र फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन डॉ. बोकारे के हाथों संपन्न हुआ। समारोह विश्वविद्यालय के महात्मा ज्योतिबा फुले शैक्षणिक परिसर स्थित जमनालाल बजाज प्रशासनिक भवन के राजकपूर सभागार में आयोजित किया गया। अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. बोकारे ने की, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में सीए राजेश लोया, अतुल पांडे, मिलिंद लेले और अजय राजकारणे उपस्थित रहे। डॉ. बोकारे ने कहा, “चित्रपट (फिल्म) भी एक कला है, जिसे अभिव्यक्ति और सृजन का मंच चाहिए। फिल्म महोत्सव के जरिए विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिला है।” उन्होंने कहा कि सिनेमा और थिएटर समाज का दर्पण होते हैं, जो सामाजिक मुद्दों और संवेदनाओं को बखूबी उजागर करते हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए नागपुर चलचित्र फाउंडेशन और विश्वविद्यालय प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। प्रमुख अतिथि राजेश लोया ने युवाओं पर फिल्मों के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आज के दौर में सिनेमा समाज और पीढ़ी को गहराई से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिल्मों के जरिए सकारात्मक संदेश देने की जरूरत है ताकि युवा पीढ़ी सही दिशा में प्रेरित हो सके। आयोजन समिति के सदस्य जय गाला ने जानकारी दी कि फेस्टिवल में 350 फिल्मों का पंजीकरण हुआ, जिनमें 138 नागपुर से और 178 विदर्भ क्षेत्र की हैं। इन फिल्मों में 22 भाषाओं की फिल्मों का समावेश है। फेस्टिवल के अंतर्गत बनाई गई ‘चलचित्र नगरी’ में 100 से 150 वर्ष पुराने कैमरे, टेप रिकॉर्डर और दूरदर्शन जैसी दुर्लभ वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। इसके साथ भारतीय फिल्म उद्योग का ऐतिहासिक सफर पेंटिंग्स और छायाचित्रों के जरिए दिखाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रबंधन परिषद सदस्य डॉ. समय बनसोड, वाणिज्य और प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता डॉ. संजय कवीश्वर, मानव विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. शामराव कोरेटी, और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कोमल मेहता ने किया और आभार प्रदर्शन जुई हरिदास ने किया।










