नागपुर. नागपुर में राजनीति को व्यवसाय नहीं बल्कि समाजसेवा का माध्यम मानने वाले एक अद्वितीय नगरसेवक का नाम है गोपीचंद कृष्ण कुमरे। उन्होंने न सिर्फ अपनी राजनैतिक जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया है, बल्कि अपने पारंपरिक व्यवसाय को भी पूरी मेहनत और लगन के साथ चलाया है। गोपीचंद कुमरे का पारंपरिक व्यवसाय ‘कृष्ण सैंडविच सेंटर’ है, जो नागपुर के इतवारी इलाके में स्थित है। इस सैंडविच सेंटर की शुरुआत गोपीचंद कुमरे के पिता ने की थी, और पिछले 40 सालों से यह सेंटर शहर के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। पिछले 10 सालों से गोपीचंद कुमरे इस सेंटर को संभाल रहे हैं। 2012 में अपक्ष उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद, 2017 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में भी विजयी हुए। गोपीचंद का दैनिक रूटीन अनुशासित है और उन्होंने अपने प्रभाग में 25 से 30 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए हैं। 2019 में दुर्बल घटक समिति के चेयरमैन पद पर रहते हुए उन्होंने 56 करोड़ रुपये के फंड का उपयोग विभिन्न विकास कार्यों में किया। गोपीचंद का कहना है कि राजनीति के साथ-साथ व्यवसाय को भी समान रूप से महत्व देना चाहिए। उनका कहना हैं की राजनीती में कोई गारंटी नहीं आज नगरसेवक हु कल नहीं रहूँगा इसलिए में अपनी पारंपरिक व्यवसाय के साथ जुड़ा हु और बिना शर्माएं यह सैंडविच का स्टॉल चलता हु. आज के युवाओं से यही कहना हैं की पहले अपने रोजीरोटी पर ध्यान दे, आर्थिक रूप से सक्षम बने बादमे ही राजनीति में कदम रखे. गोपीचंद कुमरे ने अपने जीवन में मेहनत और ईमानदारी का मार्ग अपनाकर सफलता हासिल की है। उनका मानना है कि राजनीति केवल समाजसेवा का एक माध्यम है, जिससे वे अपने शहर और समाज की भलाई के लिए कार्य कर सकते हैं। नगरसेवक होने के नाते उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किए हैं, जिनसे नागपुर के लोगों को सीधे तौर पर लाभ हुआ है। गोपीचंद कुमरे ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति और समाजसेवा के साथ-साथ पारंपरिक व्यवसाय को भी सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकता है। उनका जीवन और काम करने का तरीका हमें सिखाता है कि सच्ची मेहनत और ईमानदारी से किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। गोपीचंद कुमरे नागपुर के उन गिने-चुने नगरसेवकों में से एक हैं, जिन्होंने अपने पारंपरिक व्यवसाय को निभाते हुए समाजसेवा में भी उत्कृष्ट योगदान दिया है। उनकी यह कहानी प्रेरणादायक है और यह साबित करती है कि राजनीति केवल समाजसेवा का माध्यम हो सकती है, यदि इसे सही तरीके से निभाया जाए।











