नागपुर. एम्स नागपुर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आदिवासी स्वास्थ्य सम्मेलन के समापन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आदिवासी समुदाय के स्वास्थ्य के लिए समग्र स्वास्थ्य नीति बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस नीति में सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों, विशेषज्ञों की सलाह और समाधान को ध्यान में रखते हुए आदिवासी स्वास्थ्य के मूलभूत प्रश्नों पर प्रभावी समाधान तैयार किए जाएंगे। यह नीति न केवल महाराष्ट्र में, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर भी उपयोगी साबित होगी। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नागपुर के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने बताया कि आदिवासी समाज ने हजारों वर्षों से अपनी परंपराओं और प्राकृतिक ज्ञान के माध्यम से अपनी अस्तित्व रक्षा की है। उन्होंने पारंपरिक आदिवासी उपचार और आधुनिक चिकित्सा को एक साथ लाकर आदिवासी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण, सिकलसेल और मलेरिया जैसी स्वास्थ्य समस्याएं आज भी मौजूद हैं, और इनसे निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही हैं। उन्होंने सिकलसेल रोग निवारण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की और सभी से इस दिशा में मिलकर काम करने की अपील की। समारोह के दौरान, बिल गेट्स फाउंडेशन, सन फार्मा, और आईसीएमआरए जैसे संगठनों के सहयोग से गडचिरोली जिले को मलेरिया मुक्त बनाने का भी ऐलान किया गया। इस सम्मेलन में आदिवासी स्वास्थ्य से संबंधित आंकड़े और शोध एकत्रित किए गए हैं, जिन्हें आगे चलकर नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा। कुलगुरु लेफ्टनेंट जनरल माधुरी कानिटकर (निवृत्त) ने कहा कि इस सम्मेलन ने आदिवासी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए एक सशक्त आधार प्रदान किया है। एम्स नागपुर के निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी ने कहा कि इस सम्मेलन का सकारात्मक प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाई देगा, और आदिवासी स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने एम्स परिसर में आदिवासी गांव का दौरा भी किया और वहां की सुविधाओं का निरीक्षण किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दर्शन दक्षिणदास ने किया, जबकि आभार व्यक्त MUHS FIST-25 के संयोजन समिति के सदस्य संदीप राठोड ने किया।











