न्याय प्रक्रिया को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएं: न्यायमूर्ति भूषण गवई

चंद्रपुर. भारतीय संविधान का प्रमुख उद्देश्य राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक न्याय की स्थापना करना है। विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका—ये तीनों संस्थाएँ आम नागरिकों के हित में कार्य करती हैं। संविधान के दायरे में बने कानूनों की समीक्षा करना न्यायपालिका का दायित्व है। नागरिकों को कम समय और कम खर्च में न्याय मिले, जिससे न्याय प्रक्रिया समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, ऐसा प्रतिपादन सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति भूषण गवई ने किया। वे चंद्रपुर जिला न्यायालय की नवीन विस्तारित इमारत के भूमिपूजन उपरांत वन अकादमी में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल पानसरे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे, जबकि मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे, प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश समृद्धि भीष्म, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एड. गिरीश मार्लीवार, सचिव अविनाश खड़तकर तथा अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी मंच पर उपस्थित थे।

संविधान का उद्देश्य – सभी को शीघ्र न्याय

न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने देश को एक उत्कृष्ट संविधान प्रदान किया है। इस वर्ष संविधान निर्माण का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय की विस्तारित इमारत सुविधाजनक होगी, लेकिन इससे नागरिकों को शीघ्र और कम खर्च में न्याय मिलना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह इमारत सामाजिक एवं आर्थिक न्याय प्रदान करने का केंद्र बनेगी।

चंद्रपुर को मिलेगा न्यायिक क्षेत्र में नया आयाम

न्यायमूर्ति गवई ने चंद्रपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र विधि क्षेत्र में भी कई प्रतिभाओं का केंद्र रहा है। उन्होंने कोल्हापुर, नागपुर और अमरावती की न्यायालयीन इमारतों का उदाहरण देते हुए कहा कि सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता की इमारतें तैयार की गई हैं और चंद्रपुर में भी समय पर उत्कृष्ट निर्माण होगा। उन्होंने इस भूमिपूजन को वरुरा स्थित महारोगी सेवा समिति के अमृत महोत्सव के साथ जोड़ने को भी एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।

उत्कृष्ट न्यायालय भवन का निर्माण अपेक्षित

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति अनिल पानसरे ने कहा कि न्याय का अर्थ पारदर्शिता एवं ईमानदारी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि चंद्रपुर में एक ऐसी भव्य न्यायिक इमारत बने, जिसमें प्रवेश करते ही न्याय मंदिर का अनुभव हो। न्यायमूर्ति नितीन सांबरे ने बताया कि इस भवन का भूमिपूजन पहले 25 जनवरी 2025 को प्रस्तावित था, लेकिन इसे विशेष रूप से आज संपन्न किया गया। वहीं मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे ने कहा कि नई इमारत से न्यायिक प्रक्रिया में और अधिक गति आएगी और न्यायाधीशों, वकीलों और कर्मचारियों को आधुनिक सुविधाएँ मिलेंगी।

भूमिपूजन का भव्य आयोजन

इस अवसर पर न्यायमूर्ति भूषण गवई, आलोक आराधे, नितीन सांबरे और अनिल पानसरे ने विधिवत रूप से भूमिपूजन संपन्न किया। प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश समृद्धि भीष्म ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का संचालन न्यायाधीश तुषार वाझे और एडवोकेट वैष्णवी सराफ ने किया। कार्यक्रम में विधायक किशोर जोरगेवार, जिलाधिकारी विनय गौड़ा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक जॉनसन, मनपा आयुक्त विपिन पालिवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रीना जनबंधु सहित न्यायिक अधिकारियों, वरिष्ठ वकीलों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही।

ऐसी होगी न्यायालय की विस्तारित इमारत

➡ तल मंजिला + 7 मंजिला विशाल न्यायालय भवन
➡ प्रशासनिक स्वीकृति – वर्ष 2023
➡ कुल लागत – 60 करोड़ रुपये
➡ 12 आधुनिक कोर्ट हॉल
➡ वकीलों के लिए बार रूम और न्यायालय प्रशासनिक कक्ष

यह नई इमारत अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगी और न्यायिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में सहायक बनेगी।

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