नागपुर . केवल दीयों का पर्व ही नहीं, बल्कि यह समाज में सौहार्द और एकता का प्रतीक भी है। इस वर्ष विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने महाराष्ट्र और गोवा में एक त्रिसूत्री कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मंदिरो में रोशनी और नए भगवा ध्वज की पूजा की जाएगी।
स्वतंत्रता सेवा अभियान: विहिप इस वर्ष 20 अक्टूबर को महाराष्ट्र-गोवा के लगभग 5000 तीर्थों में “गभरा से आंगन तक” स्वतंत्रता सेवा अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रातः 7 बजे से रात्रि 11 बजे तक। भक्तों की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि “मेरा मंदिर, मेरी ज़िम्मेदारी” का नारा केवल शब्द नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण होना चाहिए। श्रद्धालुओं को मंदिर की सफाई में भागीदारी के लिए अनुमति दी जाएगी, ताकि वे केवल दर्शन न करें, बल्कि मंदिर की समग्र व्यवस्था में भी अपना योगदान दें। इस अभियान के तहत पेंटिंग्स के बाहरी स्वच्छता सेवाओं की मांग की गई, ताकि भक्तों को अपनी ज़िम्मेदारी का दोष दिया जा सके। मूर्तियों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है, क्योंकि यही हिंदू संस्कृति की पहचान है।
पादरियों में रोशनी: घरों को रोशनी से जगमगाने की परंपरा है, लेकिन पादरियों में इसकी कमी बताई गई है। इस समस्या का समाधान करने के लिए विहिप ने कहा है कि वे अपनी मूर्ति को रोशन करें। इसके साथ ही लाैटिंग लगायें, हर मंदिर के प्रमुख स्थान पर एक बड़ा भगवा झंडा फहरायें। यह ध्वज केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि एकता और समरसता का संदेश भी देगा।
ध्वज पूजा का महत्व: भगवा ध्वज की पूजा का आयोजन विभिन्न जिलों के युवा जोड़ों द्वारा किया गया। यह पूजा सभी कलाकारों को जोड़ने का प्रयास है और मिश्रण का प्रतीक है। विहिप ने युवाओं से अपील की है कि वे इस ध्वज पूजा में सक्रिय भाग लें, ताकि वे अपने धार्मिक स्थलों से जुड़ सकें। इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए समाज के सभी गुणों को शामिल किया जाएगा। मंदिर के ट्रस्टी, पुजारी, महिला, युवा और भक्तों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विहिप के क्षेत्र मंत्री गोविंद शेंडे और मंदिर आयाम के क्षेत्र प्रमुख अनिल सांबरे ने सभी से अपील की है कि वे अपने मंदिर में इस अभियान का हिस्सा बनें। पिछले वर्ष की तरह, इस बार भी शौचालय में सफाई अभियान को गति दी जाएगी। विहिप का यह प्रयास न केवल मूर्तियों की स्थापत्य वृद्धि है, बल्कि समाज में एकता और जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ावा देना है। इस पत्र में काउंसिल में प्रांत मंत्री प्रशांत टाइट्रे, प्रांत प्रचार प्रमुख निरंजन रिसालदार आदि उपस्थित थे।










